पटना, 22 जनवरी (आईएएनएस)। माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी) की तरफ से प्रेमचंद रंगशाला, बिहार संगीत नाटक अकादमी में 'कर्मयोगिनी माता अहिल्या' शीर्षक से महानटक का मंचन किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने माता अहिल्या की चित्र में पुष्पांजलि देकर उनको नमन किया, साथ ही साथ दीप प्रज्जवलित किया।
माता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती पर उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह हमारी सनातन संस्कृति संस्कार की प्रेरणापुंज व शक्ति हैं जो सनातन की भक्ति को और नई पीढ़ी को आज प्रेरित करती हैं। उनको हम नमन करते हैं, उनके महानाटक नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करते हैं, और हर स्वाभिमान के साथ अपनी सनातन संस्कृति को बढ़ाते हैं और 21वीं सदी का भारत बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी माता अहिल्या बाई होल्कर के कई ऐसे प्रेरणापुंज कार्यों को अपने राजनीतिक जीवन में उतारा है और मानवता की सेवा के भाव को जगाया है। हम इनको नमन करते हैं।
इस दौरान सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी) के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने आईएएनएस से बीतचीत में कहा कि हम लोगों ने सीसीआरटी की तरफ से यह निश्चित किया था कि हमारे पुरुषों की कहानी हमारे देश और बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। देशवासियों को यह समझना चाहिए कि हमारे महापुरुषों ने कितने महान कार्य किए हैं। इसी सिलसिले में हमने बहुत सारे नाटक किए। खासकर रानी दुर्गावती और संत मीराबाई पर नाटक किए। हाल ही में हमने अहिल्याबाई होल्कर पर नाटक शुरू किया है। संदेश देने के लिए नाटक बहुत सशक्त माध्यम होता है, क्योंकि इसमें संवाद, ड्रामा, म्यूजिक सबकुछ होता है। मन में विचार आया कि नाटक के माध्यम से यह कहानी लोगों तक पहुंचाई जाए।
उन्होंने कहा कि यह 300 साल पुरानी कहानी है। इस हिसाब से यह एक ऐतिहासिक नाटक है। उस समय जैसी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति थी और कैसे अहिल्या ने उन परिस्थितियों का सामना किया, यह सब नाटक में दिखाया गया।
उन्होंने राजनीति के साथ-साथ हर क्षेत्र में महान कार्य किए। उन्होंने कई धार्मिक कार्य किए। कई विशाल और भव्य मंदिर बनवाए। इसलिए उनको कर्मयोगिनी कहा जाता है।
महानाटक में छोटी अहिल्या बाई का किरदार निभाने वाली जानवी सिंह ने आईएएनएस से बताया कि छोटी अहिल्या बाई का रोल करके काफी गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। माता अहिल्या बाई के इस नाटक का मंचन हमने देश के पांच अलग-अलग शहरों में किया है। छोटी अहिल्या के रोल में उनको थोड़ी नटखट और चुलबुली दिखाया गया है, जबकि बड़ी अहिल्या शांत और गंभीर दिखाई गई हैं।
जानवी ने कहा कि इस किरदार से मुझे यह समझ आया कि उन्होंने कैसे इतनी कम उम्र में इनती बड़ी जिम्मेदारियों को निभाया। छोटी उम्र में उनकी शादी हो गई थी, जिसके बाद उनको बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना बड़ा। इससे यह सीख मिलती है कि कम उम्र में भी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाया जा सकता है।
नाटक में बड़ी अहिल्या बाई की किरदार निभाने वाली शारा शर्मा ने कहा कि उनका किरदार निभाना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। वो एक महान महिला थीं। कैसे उन्होंने चुनौतियों का सामना किया। उनके किरदार में उनको फिर से जीवित करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। जीवन में कितने भी दुख आ जाएं, कितनी भी मुसीबतें आ जाएं, फिर भी लोगों के साथ मिलजुलकर रहना। यह इतनी बड़ी सीख हमें मिलती है, जिसको सबको सीखना चाहिए।
--आईएएनएस
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