भारत टैक्सी : 35 लाख यूजर्स और 6 लाख से ज्यादा सारथी के साथ बनी सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव

भारत टैक्सी : 35 लाख यूजर्स और 6 लाख से ज्यादा सारथी के साथ बनी सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव

गांधीनगर, 28 मई (आईएएनएस)। जब हम 'सहकारिता' शब्द सुनते हैं, तो अक्सर हमारे जेहन में अमूल की दूध क्रांति का चित्र उभरता है। लेकिन, आज गुजरात की सड़कों पर एक नई डिजिटल क्रांति दौड़ रही है, जिसका नाम है 'भारत टैक्सी'।

यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के सपने को सच करते उन हजारों सारथियों की कहानी है, जो अब किसी कंपनी के कर्मचारी नहीं, बल्कि इस मोबिलिटी प्लेटफॉर्म के खुद मालिक हैं। 5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई यह पहल, तकनीक और मानवीय गरिमा के संगम का दुनिया का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है।

भारत टैक्सी के चेयरमैन और अमूल के एमडी जयेन मेहता इस बदलाव को एक बड़ी क्रांति के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार, "भारत टैक्सी ने ड्राइवर-ओन्ड मॉडल को धरातल पर उतारकर यह सुनिश्चित किया है कि राइड की 100 प्रतिशत कमाई बिना किसी कटौती के सीधे ड्राइवर्स तक पहुंचे। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में उभरकर न केवल सारथियों की गरिमा बहाल कर रही है, बल्कि 'सहकार से समृद्धि' के विजन को वैश्विक स्तर पर एक नया बेंचमार्क दे रही है।"

मोबिलिटी सेक्टर में अब तक सारथियों की सबसे बड़ी त्रासदी भारी-भरकम कमीशन और अनिश्चित आय रही है। 'भारत टैक्सी' ने इस पुराने ढर्रे को ध्वस्त कर दिया है। यहां कोई बिचौलिया या कॉर्पोरेट नहीं है, बल्कि सारथी ही इस कोऑपरेटिव के स्टेकहोल्डर्स हैं। इसका सीधा इम्पैक्ट ग्राउंड जीरो पर दिख रहा है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद एक औसत सारथी की मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक का उछाल आया है। यह आंकड़ा केवल कमाई नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की खुशहाली का दस्तावेज है, जो अब पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल से बाहर निकल रहे हैं।

सारथियों के जीवन में आए इस बदलाव को प्रवीण ठाकोर के अनुभव से बखूबी समझा जा सकता है। वे बताते हैं, "अन्य कंपनियों के साथ काम करना अब फायदेमंद नहीं रह गया था। लेकिन, 'भारत टैक्सी' से जुड़ने के बाद हमें बेहतरीन रेट और रिस्पॉन्स मिल रहे हैं। इस मॉडल से जुड़कर कोई भी सारथी अच्छी कमाई कर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।"

भारत टैक्सी केवल सारथियों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ‘पैसेंजर एक्सपीरियंस’ को भी एक नया आयाम दिया है। जहां निजी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स में ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ के कारण किराए में अनिश्चितता बनी रहती है, वहीं भारत टैक्सी ने किराया संरचना को स्थिर और पारदर्शी रखा है। इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिल रहा है, जिन्हें औसतन 15 प्रतिशत तक कम किराया देना पड़ रहा है।

यात्रियों की इस बचत और सारथियों की आजादी के इस 'विन-विन' मॉडल की जमीनी हकीकत बताते हुए ड्राइवर जनक बारोट कहते हैं, "यहां 'जीरो कमीशन' है और भुगतान सीधे हमारे खाते में आता है। हम खुद को इसका मालिक महसूस करते हैं। अन्य कंपनियों के 30 रुपए प्रति किमी के मुकाबले हम ग्राहकों से 17-18 रुपए प्रति किमी का किफायती रेट ले रहे हैं, जो उनके लिए भी फायदेमंद है। भविष्य में संस्था के विस्तार के साथ ही हमें पेंशन और बीमा जैसी योजनाओं का लाभ भी मिलेगा।"

गुजरात में 1 लाख सहित देशभर में 6 लाख से अधिक सारथियों और 35 लाख से ज्यादा ऐप डाउनलोड्स के साथ 'भारत टैक्सी' तेजी से एक मजबूत राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म बन रही है। अहमदाबाद और सूरत में शानदार सफलता के बाद, अब वडोदरा कंपनी के विस्तार का अगला प्रमुख केंद्र है। अपनी जमीनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए कंपनी 'बिलो द लाइन' (बीटीएल) रणनीति के तहत आईटी पार्क, हाउसिंग सोसायटी और एयरपोर्ट जैसे अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में सीधे यूजर्स से जुड़कर इसे एक जन-केंद्रित ब्रांड बना रही है।

इस बढ़ते नेटवर्क और आसान प्रक्रिया पर अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के प्रेसिडेंट अजय कुमार गुप्ता कहते हैं, "ग्राहकों को यह बात बहुत आकर्षित करती है कि यह 'अपने भारत की कंपनी' है और इसमें सारथियों से कोई कमीशन नहीं लिया जाता। मेरी सभी सारथियों से अपील है कि वे इससे जुड़ें। इसकी प्रक्रिया इतनी आसान है कि ऐप पर खुद दस्तावेज सबमिट करने के महज 12 घंटों के भीतर अप्रूवल मिल जाता है।"

सुरक्षा और तकनीक के बेजोड़ तालमेल का प्रमाण गुजरात पुलिस के साथ इसका सीधा एसओएस इंटीग्रेशन है, जो यात्रियों और सारथियों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। इतना ही नहीं, सोमनाथ और द्वारकाधीश जैसे पावन तीर्थ स्थलों के लिए समर्पित रूट कनेक्टिविटी ने भारत टैक्सी को केवल शहरी परिवहन तक सीमित न रखकर, श्रद्धालुओं की आस्था और भरोसे का सारथी भी बना दिया है।

इतना ही नहीं, सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब तक 10,000 से अधिक ड्राइवरों को डिजिटल लिटरेसी और सॉफ्ट स्किल्स का गहन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मेट्रो, जीएसआरटीसी और एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ इसके 'इन्टीग्रेटेड ट्रांजिट सिस्टम' ने गुजरात में सफर को एक निर्बाध अनुभव में बदल दिया है।

--आईएएनएस

एसके/एबीएम