अरावली की चोटी पर बना 'बादलों का महल', 17वीं सदी के शाही ठिकाने में दिखता है राजपूत-मुगल कला का संगम

अरावली की चोटी पर बना 'बादलों का महल', 17वीं सदी के शाही ठिकाने में दिखता है राजपूत-मुगल कला का संगम

बूंदी, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के रेगिस्तान में कई खूबसूरती छिपी है, जो भारत की सुंदरता को और भी बढ़ाने का काम करती है। अरावली पहाड़ियों की ऊंची चोटी पर स्थित बादल महल भी कुछ ऐसा ही है। यह बादलों के बीच बसा एक शाही ठिकाना है। जहां एक तरफ तारागढ़ किले की भव्यता नजर आती है, वहीं दूसरी तरफ नवल सागर झील का शांत पानी दिखाई देता है।

17वीं शताब्दी में बना यह महल बूंदी के शासकों का आरामगाह था। इसका नाम “बादलों का महल” बिल्कुल सटीक है, क्योंकि कोहरे और बादलों से घिरा यह महल अक्सर नीचे की दुनिया से अलग-थलग नजर आता है।

बादल महल निर्माण की कहानी भी रोचक है। बादल महल की नींव बूंदी के शासक राव रतन सिंह ने 17वीं शताब्दी में रखी थी। वे कला और संस्कृति के बड़े कद्रदान थे। सरकारी कामों के लिए बने अन्य महलों से अलग, बादल महल को खास तौर पर शाही परिवार के आराम और विश्राम के लिए बनाया गया था। राव रतन सिंह का सपना था कि उनका परिवार पहाड़ी की चोटी पर एक शांत और सुरक्षित जगह पर रहे। इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने इस खूबसूरत महल का निर्माण करवाया।

अरावली की ऊंचाई पर होने के कारण यहां अक्सर कोहरा और बादल छाए रहते हैं। इससे पूरा माहौल जादुई लगता है। महल की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल छत है, जहां से चारों ओर का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। यहां से तारागढ़ किला, नवल सागर झील और आसपास की पहाड़ियां बेहद खूबसूरत दिखती हैं। शाही परिवार यहां उत्सव मनाने और आराम करने आता था।

बादल महल राजपूत और मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। महल में बारीक नक्काशी, जालीदार काम और रंग-बिरंगी भित्तिचित्र (दीवार चित्र) देखने लायक हैं। महल में प्रवेश दक्षिणी दीवार पर बने बरामदे से होता है। महल को पांच हिस्सों में बांटा गया है। सबसे निचले हिस्से में कोई चित्र नहीं है। दूसरे हिस्से में 36 रागमाला चित्रों की पूरी श्रृंखला बनी है, जो बूंदी की खास चित्रकारी शैली में बनाए गए हैं। तीसरे हिस्से में ऐतिहासिक दृश्य दिखाए गए हैं। यहां 23 मीटर लंबी पट्टी पर राव रतन सिंह और उनके परिवार को हाथियों की लड़ाई, शिकार, पोलो और जुलूस जैसी गतिविधियों में दिखाया गया है।

वहीं, चौथे हिस्से में राव रतन सिंह को यूरोपीय मेहमानों, सम्मानित हस्तियों और साहित्यिक नायक माधव के साथ दर्शाया गया है। एक खास चित्र में उन्हें दरबार में एक कलाकार से छोटी पेंटिंग लेते हुए दिखाया गया है, जिसमें पीछे बादल महल ही बना हुआ है। इससे 17वीं शताब्दी के महल की झलक मिलती है। सबसे ऊपरी हिस्से में छत है, जहां बीच में बड़ा गुंबद और चारों ओर छोटे गुंबद बने हैं। छत पर भगवान विष्णु के दस अवतारों के सुंदर चित्र बने हुए हैं।

बादल महल के भित्तिचित्र बूंदी की चित्रकारी शैली को एक नया आयाम देते हैं। इन चित्रों ने बाद में कोटा स्कूल ऑफ पेंटिंग को भी प्रभावित किया। ये चित्र आज भी अपनी ताजगी और रंगों के लिए मशहूर हैं।

अरावली की चोटी पर स्थित बादल महल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि बूंदी के शाही अतीत, कला प्रेम और राजसी जीवनशैली की जीती-जागती कहानी है। इस भव्य और अद्भुत महल को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां आने वाले लोग महल की छत पर खड़े होकर अरावली की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाते हैं। महल की भित्तिचित्रें, नक्काशी और शाही वास्तुकला देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। शाम के समय यहां का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है।

--आईएएनएस

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