मुंबई, 30 सितंबर (आईएएनएस)। संगीतकार सचिव देव बर्मन को संगीत जगत में एसडी बर्मन के नाम से जाना जाता था। उनकी बनाई धुनों में लोक संगीत की मिठास थी और शास्त्रीय संगीत की गहराई भी। उनके काम करने का तरीका भी काफी अलग था। वह अपनी बनाई धुन को लेकर इतने सजग रहते थे कि कभी-कभी उसकी प्रतिक्रिया जानने के लिए बड़े कलाकारों के बजाय अपने आसपास मौजूद लोगों की राय भी सुन लेते थे।
सचिन देव बर्मन का जन्म 1 अक्टूबर 1906 को त्रिपुरा के शाही परिवार से जुड़े घराने में हुआ था। उनके परिवार में संगीत का माहौल था और बचपन से ही संगीत की शिक्षा मिली। इसके बावजूद उन्होंने राजघराने की सुरक्षित जिंदगी चुनने के बजाय संगीत को करियर बनाया। यही फैसला आगे चलकर उन्हें मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक ले गया। उन्हें फिल्मी दुनिया में जगह बनाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
एसडी. बर्मन को अलग आवाज और संगीत की शैली को लेकर कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपना तरीका नहीं बदला। धीरे-धीरे उनके संगीत की पहचान बनने लगी और 1940 के दशक में फिल्मों में काम मिलने लगा। 1948 की 'दो भाई' का 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' उनके करियर के शुरुआती यादगार गीतों में शामिल हुआ। इसके बाद 'नौजवान', 'जाल' समेत कई दूसरी फिल्मों ने उनके संगीत को लोगों तक पहुंचाया।
एसडी. बर्मन गाने के मूड, शब्दों और आवाज के बीच सही तालमेल को ज्यादा महत्व देते थे। उनकी बनाई धुनों में बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के लोक संगीत की झलक भी दिखाई देती थी। उनका संगीत उस समय के दूसरे फिल्मी संगीत से अलग सुनाई देता था।
उनके काम करने का तरीके भी बेहद दिलचस्प था। उनकी जीवनी 'एस.डी. बर्मन: द प्रिंस म्यूजिशियन' में एक किस्सा शामिल है। इस किताब के लेखक अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और बालाजी विट्ठल ने उनके संगीत और काम करने के तरीके पर विस्तार से लिखा है। उनके मुताबिक, बर्मन अपनी बनाई धुनों को सुनकर प्रतिक्रिया लेने में सिर्फ बड़े संगीतकारों या नामी लोगों पर निर्भर नहीं रहते थे। वह अपने रूम बॉय को भी धुन सुनाते और उसकी प्रतिक्रिया देखते थे। इसके पीछे का कारण यह होता था कि वह यह देखना चाहते थे कि आम श्रोता के कानों को संगीत कैसा लगेगा।
आगे चलकर एसडी. बर्मन ने देव आनंद, गुरु दत्त, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। 'पेइंग गेस्ट', 'प्यासा', 'काला पानी', 'कागज के फूल', 'गाइड', 'आराधना' और 'अभिमान' जैसी फिल्मों के संगीत ने उनकी पहचान और मजबूत की। एसडी. बर्मन को दो बार फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार मिला और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया गया।
सालों तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहने वाले एसडी. बर्मन का निधन 31 अक्टूबर 1975 को मुंबई में हुआ।
--आईएएनएस
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