आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा में लागू करने की रूपरेखा, उद्योग व स्टार्टअप्स भी शामिल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा में लागू करने की रूपरेखा, उद्योग व स्टार्टअप्स भी शामिल

नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शिक्षा में लागू करने की रूपरेखा तैयार की है। इसके लिए शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ भी व्यापक विचार विमर्श किया गया है। स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सदुपयोग पर मंगलवार को भी शिक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया।

यह सत्र नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में आयोजित किया गया। सत्र में देश के नामी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा इस बात पर रही कि नीति, तकनीक और संस्थान के स्तर पर किस तरह बड़े पैमाने पर शिक्षा व्यवस्था को बदल सकते हैं। इस सत्र का शीर्षक था, ‘मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन: पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया।’ कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी मौजूद रहे।

यहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह समिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का नतीजा है। इसका मकसद भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को तेजी से आगे बढ़ाना है। उन्होंने साफ कहा कि आज दुनिया भारत को एक ऐसे देश के रूप में देख रही है जो तेजी से एआई को अपना रहा है। उनका मानना है कि एआई भारत को वैश्विक ज्ञान शक्ति बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

उन्होंने युवाओं पर खास जोर देते हुए कहा कि आज की पीढ़ी अलग तरह से सोचती है। उनके मुताबिक ‘एआई इन एजुकेशन और एजुकेशन इन एआई’ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यानी शिक्षा में एआई का इस्तेमाल भी जरूरी है और छात्रों को एआई की पढ़ाई भी करनी होगी। अगर युवा एआई का सही इस्तेमाल करें तो वे नई पहल कर सकते हैं और भारत को दुनिया में अग्रणी बना सकते हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि समिट में हुई चर्चाएं बेहद उपयोगी रहीं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा की शुरुआती पढ़ाई से लेकर स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और ग्लोबल लीडरशिप तक, हर स्तर पर एआई को व्यवस्थित तरीके से जोड़ने पर चर्चा हुई। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और स्किल इंडिया के पवेलियन भी देखे, जहां भारत में विकसित और ज़मीन पर लागू हो रहे एआई समाधानों को प्रदर्शित किया गया।

गौरतलब है कि पिछले दस साल में शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, नई नीतियों, संस्थागत सुधारों और बड़े स्तर पर क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के जरिए एआई आधारित शिक्षा की नींव रखी है। पिछले बजट के बाद आईआईटी मद्रास में एआई फॉर एजुकेशन का एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया गया है। मंत्रालय ने शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ लगातार चर्चा कर एआई को शिक्षा में लागू करने की रूपरेखा तैयार की है।

हाल ही में “भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026” भी आयोजित किया गया था, जिसमें जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल का स्पष्ट संदेश था कि अब बात सिर्फ योजना बनाने की नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर उसे लागू करने की है। सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान मिलकर एआई के जरिए भारत की शिक्षा प्रणाली को मजबूत और भविष्य के लिए तैयार करना चाहते हैं, ताकि विकसित भारत 2047 का सपना हकीकत बन सके।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएस