नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। भारत की मशहूर महिला निशानेबाज अपूर्वी चंदेला ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में देश के लिए कई पदक जीते हैं। उन्हें यह खेल विरासत में मिला है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में नया रिकॉर्ड कायम करते हुए अपूर्वी ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जिसने उनके करियर को नई ऊंचाइयां दीं।
अपूर्वी का जन्म 4 जनवरी 1993 को जयपुर में होटल कारोबार से जुड़े कुलदीप सिंह चंदेला और बिंदू के घर हुआ। अपूर्वी के परदादा के चचेरे भाई डॉ. करणी सिंह कोच थे। वही पांच बार के ओलंपियन करणी सिंह, जिनके नाम पर नई दिल्ली में शूटिंग रेंज भी है।
खुद अपूर्वी के पिता शूटिंग में रुचि रखते थे, लेकिन बेटी एक खेल पत्रकार बनना चाहती थीं। अजमेर और जयपुर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद अपूर्वी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया।
साल 2008 में अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में भारत को शूटिंग में गोल्ड मेडल दिलाया,जिसने अपूर्वी को भी इस खेल के लिए प्रेरित किया।
जयपुर की शूटिंग रेंज में अपूर्वी ने सटीक निशानों के साथ सभी को प्रभावित किया, जिसे देखते हुए पिता ने उन्हें एक राइफल गिफ्ट की। चाचा हेम सिंह ने प्रैक्टिस में मदद के लिए घर पर ही एक शूटिंग रेंज बनवाई।
साल 2012 में अपूर्वी ने नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। इसके बाद साल 2014 में इंटरशूट चैंपियनशिप में चार मेडल जीते। इसी साल ग्लासगो में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में 206.7 के स्कोर के साथ नया रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड जीता।
साल 2015 में वर्ल्डकप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद अपूर्वी ने 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन भारत को पदक नहीं जिता सकीं।
इसके बाद साल 2018 में अपूर्वी ने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी साल कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीते। साल 2019 में अपूर्वी वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-1 बनीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन वर्ल्ड कप में 253.9 स्कोर के साथ गोल्ड जीता। अपूर्वी ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाई, लेकिन इस बार भी वह मेडल जीतने में नाकाम रहीं।
शूटिंग में उत्कृष्ट योगदान के लिए अपूर्वी चंदेला को साल 2016 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। निश्चित तौर पर अपूर्वी ने इस खेल में महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया है।
--आईएएनएस
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