नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड बनाने से छोटे उद्योगों को फंडिंग तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। यह जानकारी इंडस्ट्री की ओर से बुधवार को दी गई।
पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड बनाना एक बड़ा कदम है और इससे छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या आसान फंडिंग तक पहुंच का समाधान होगा। सरकार इसमें इक्विटी के जरिए भाग लेगी, तो इससे निवशकों का भी छोटे उद्योगों पर विश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार इसमें एमएसएमई आईपीओ के जरिए भाग लेगी। इससे उन एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा, जो इक्विटी मार्केट में आना चाहते हैं और अपने कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं।
फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) के उपाध्यक्ष के सतीश नागराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि हमें लगता है कि यह एक बहुत अच्छा कदम है। सेबी से मंजूरी प्राप्त बैंकों के जरिए एमएसएमई को दस हजार करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। इसका तीन गुना फायदा उठाया जाएगा, जिससे एमएसएमई को लगभग चालीस हजार करोड़ रुपए का फंड मिलेगा और इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहर हैं। पहले हमें प्राइवेट बैंकों से फंड मिलता था, लेकिन वे कभी टियर-2 और टियर-3 शहरों में नहीं आते थे। इसलिए अब सेबी से मंजूरी प्राप्त बैंकों के तीस हजार करोड़ रुपए जोड़ने से, कुल फंड चालीस हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को 10,000 करोड़ रुपए के एसएमई ग्रोथ फंड (एसजीएफ) को स्थापित करने को मंजूरी दे दी थी। इसका उद्देश्य भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए विकास केंद्रित पूंजी को बढ़ावा देना और मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन-आधारित सेक्टर और रणनीतिक वैल्यू चेन में बेहतरीन भारतीय उद्यमों के विस्तार को सक्षम बनाना है।
यह केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई उन व्यापक घोषणाओं का हिस्सा था, जिनका मकसद पूरे एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट उपलब्ध कराना था।
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