मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) के फैसले का ऐलान बुधवार को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने किया। केंद्रीय बैंक ने इस बार भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।
यह लगातार चौथा मौका है, जब आरबीआई एमपीसी ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक 3 अगस्त को शुरू हुई थी। यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी हुई है और इससे कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई का खतरा बना हुआ है।
ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखना और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को बढ़ावा देगा।
इससे पहले जून 2026, अप्रैल 2026 और फरवरी 2026 की एमपीसी बैठक में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था।
रेपो रेट में आखिरी बार बदलाव दिसंबर, 2025 की आरबीआई एमपीसी की बैठक में किया गया था। इस दौरान रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था।
आरबीआई के द्वारा अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को यथावत रखने के फैसले से सबसे बड़ी राहत उन लाखों लोगों को मिलेगी, जिन्होंने होम लोन, कार लोन या अन्य फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन लिया हुआ है। रेपो रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं होने से उनकी मासिक ईएमआई फिलहाल नहीं बढ़ेगी, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
इसके साथ ही, नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए भी ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना टल गई है। उद्योगों और कारोबारों के लिए भी यह फैसला सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि उनकी उधारी की लागत स्थिर रहेगी और निवेश योजनाओं को गति मिल सकती है। बैंकों के लिए भी ब्याज दरों में अचानक बदलाव का दबाव नहीं रहेगा।
--आईएएनएस
एबीएस