नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। हिंदू तिथि का कैलेंडर या पंचांग पांच अंगों तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार से मिलकर बना है। सनातन धर्म में किसी भी शुभ या नए काम को शुरू करने से पहले मुहूर्त देखना आवश्यक होता है। लोग तिथि के महत्व और शुभ-अशुभ प्रभाव को ध्यान में रखकर ही कोई नया कार्य आरंभ करते हैं। वर्तमान में नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास चल रहा है। 29 मई 2026 (शुक्रवार) को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है।
त्रयोदशी तिथि 29 मई की सुबह 9 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। हालांकि उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) के अनुसार पूरे दिन त्रयोदशी का ही मान होगा। इस दिन स्वाती नक्षत्र सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और चंद्रमा पूरे दिन तुला राशि में संचार करेंगे। वहीं सूर्योदय सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 13 मिनट पर होगा। शुक्रवार को परिघ योग रहेगा।
29 मई के शुभ समय की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक, अमृत काल शुक्रवार की देर रात 3 बजकर 32 मिनट से अगले दिन (30 मई) की सुबह 5 बजकर 19 मिनट तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ये समय पूजा-पाठ, ध्यान व शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।
वहीं, शुक्रवार के अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना वर्जित माना जाता है। अन्य अशुभ समय की बात करें तो यमगंड दोपहर 3 बजकर 43 मिनट से 5 बजकर 23 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 7 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।
वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक व दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। साथ ही वर्ज्य दोपहर 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
--आईएएनएस
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