नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 26 मई एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज है। वर्ष 2014 में इसी दिन नरेंद्र मोदी ने देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर राष्ट्रीय राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत की थी।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने प्रधानमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह केवल सत्ता परिवर्तन का अवसर नहीं था, बल्कि देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में एक नई दिशा के संकेत के रूप में भी देखा गया।
लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत मिला था। लंबे समय बाद किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलने से देश में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जगी। चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने विकास, सुशासन और मजबूत नेतृत्व को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया था। जनता ने भी उन वादों पर भरोसा जताते हुए भारी समर्थन दिया।
शपथ ग्रहण समारोह में देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुई थीं। राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों, सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों और विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को पद की शपथ दिलाई और उन्होंने हिंदी में संविधान के प्रति निष्ठा और देश की सेवा का संकल्प लिया। समारोह के दौरान उपस्थित लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना होगा। गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक योजनाएं लागू करने की बात कही गई। उन्होंने नागरिकों से भी देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कई बड़े फैसले और योजनाएं सामने आईं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर देश की कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के जरिए देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का प्रयास हुआ। वहीं ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के माध्यम से साफ-सफाई को जन आंदोलन बनाने की कोशिश की गई। इसके अलावा डिजिटल इंडिया, जन धन योजना और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने भी आम लोगों के जीवन पर प्रभाव डाला।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के क्षेत्र में भी मोदी सरकार ने सक्रिय भूमिका निभाई। भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास किया और कई देशों के साथ संबंधों को नई दिशा दी। सरकार ने बुनियादी ढांचे, रेलवे, सड़क और तकनीक के क्षेत्र में भी तेजी से काम करने पर जोर दिया।
पीएम मोदी की राजनीतिक यात्रा भी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रही है। साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक पहुंचना उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी को दर्शाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग जगह बनाई। उनकी सफलता ने देश के करोड़ों लोगों को यह विश्वास दिया कि कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
26 मई 2014 का दिन इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि इसने भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की, जिसका प्रभाव आज भी देश की राजनीति और नीतियों में दिखाई देता है।
--आईएएनएस
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