1997 में नेताजी को याद कर नरेंद्र मोदी ने समझाया, राष्ट्रीय नायकों को लोगों की चेतना में क्यों जीवित रहना चाहिए?

1997 में नेताजी को याद कर नरेंद्र मोदी ने समझाया, राष्ट्रीय नायकों को लोगों की चेतना में क्यों जीवित रहना चाहिए?

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। स्वाधीनता आंदोलन के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के तौर पर नेताजी की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाया जाता है। बीते कुछ सालों में उनकी विरासत को पुनर्स्थापित करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं।

हालांकि प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय नायकों के प्रति सम्मान और समर्पण भाव नया नहीं है। 'मोदी आर्काइव' के अनुसार, नेताजी को लेकर आज जो राष्ट्रीय चेतना दिखाई देती है, उसकी जड़ें एक गहरी दार्शनिक सोच में निहित हैं।

सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर 'मोदी आर्काइव' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो जारी किया, जो 1997 में नेताजी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में उनके भाषण का एक अंश था। 1997 में नरेंद्र मोदी ने समझाया कि राष्ट्रीय नायकों को लोगों की चेतना में क्यों जीवित रहना चाहिए?

'मोदी आर्काइव' के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने एक शानदार भाषण दिया था, जिसमें राष्ट्रीय नायकों को पहचानने के प्रयास, नैतिक स्मृति को बनाए रखने और राष्ट्रीय चेतना को आकार देने के विचार थे। नरेंद्र मोदी ने कहा, "जैसे एक मंदिर गांव में भक्ति जगाता है, वैसे ही राष्ट्रीय नायकों की याद राष्ट्र के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता जगाती है।"

1997 के भाषण में पीएम मोदी ने कहा, "जब कोई सच में राष्ट्र निर्माण की जरूरत को समझता है, तो उसे एक नए संकल्प, एक नई जागृति को जन्म देने की जरूरत महसूस होती है। सुभाष बाबू की यह प्रतिमा सिर्फ सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं है। कोई कहीं बगीचा बना सकता है, चौराहे पर फव्वारा लगा सकता है, पेड़ लगा सकता है, टावर बना सकता है, रोशनी का इंतजाम कर सकता है या प्रतिमा लगा सकता है, लेकिन ये सिर्फ सौंदर्यीकरण के काम नहीं हैं। राष्ट्रीय नायकों की प्रतिमाएं शहरों को सजाने के लिए नहीं होतीं।"

उन्होंने कहा था, "राष्ट्रीय नायकों की प्रतिमाएं आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देने के लिए होती हैं। जैसे गांव के अंदर एक मंदिर गांव की सामूहिक चेतना को जगाता है और भक्ति जगाता है, उसी तरह राष्ट्रीय नायकों की यादें लोगों को देश के चरणों में सब कुछ समर्पित करने के लिए प्रेरित करती हैं।"

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शेयर किए गए एक वीडियो में नरेंद्र मोदी के सुभाष चंद्र बोस से जुड़े विचारों और महत्वपूर्ण प्रयासों का जिक्र किया गया है।

'मोदी आर्काइव' के अनुसार, पीएम मोदी का शुरुआती विश्वास दशकों बाद ठोस कार्रवाई में परिवर्तित हुआ। मुख्यमंत्री के रूप में 2009 में उन्होंने हरिपुरा से 'ई-ग्राम विश्वग्राम' लॉन्च किया, वही जगह जहां नेताजी ने स्वराज की लौ जलाई थी। फिर नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में इंडिया गेट पर भव्य प्रतिमा, रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखने, 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में स्थापित करने, नेताजी की गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करने, लाल किले में सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय और आईएनए प्रदर्शनी जैसी कई पहल कीं।

--आईएएनएस

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