मप्र भाजपा 'दिग्विजय काल' को बनाएगी चुनावी हथियार!
मप्र भाजपा 'दिग्विजय काल' को बनाएगी चुनावी हथियार!

--संदीप पौराणिक

 भोपाल 6 मई (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश में माहौल पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में नहीं है, इससे प्रदेश नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक वाकिफ है, इसीलिए उसने विधानसभा चुनाव के लिए अभी से कारगर रणनीति बनाना शुरू कर दी है।

 भाजपा इस बार के चुनाव में अपने 15 साल के शासनकाल से ज्यादा वर्ष 2003 तक के 'दिग्विजय शासन काल' को चुनावी अस्त्र बनाने का मन बना चुकी है। यह संकेत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साफ-साफ दे चुके हैं।

शाह ने शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में साफ तौर पर दिग्विजय सिंह के शासनकाल में राज्य की बदहाली का जिक्र किया और दिग्विजय सिंह को 'पिछड़ा विरोधी' करार दिया।

शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांव-गांव जाकर वर्ष 2003 की राज्य की स्थितियां और आज की स्थितियों का ब्यौरा दें। प्रदेश के कार्यकर्ता महज पांच दिन में ही अपनी बात गांव-गांव तक पहुंचा सकते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 15 साल की उपलब्धियों का ब्यौरा देने के साथ वर्ष 2003 और 2018 के तुलनात्मक विकास का ब्यौरा देने वाली एक पुस्तिका भी जारी की। इस पुस्तिका में वर्ष 2003 और वर्ष 2018 की तुलना की गई है, तब सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूली शिक्षा, राज्य का बजट, बिजली उपलब्धता का क्या हाल था और अब क्या है, इसका सिलसिलेवार ब्यौरा है।

राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए माना कि यह बात सही है कि भाजपा अगला चुनाव वर्ष 2003 बनाम 2018 को मुद्दा बनाकर लड़ने की तैयारी में है, क्योंकि मतदाताओं का बड़ा वर्ग वह है जो वर्ष 2003 की स्थिति से वाकिफ नहीं है, लिहाजा भाजपा उसे वर्ष 2003 की स्थितियां बताएगी।

वह आगे कहते हैं, "भाजपा के पास राज्य में आम आदमी की जिंदगी में बदलाव लाने वाली उपलब्धियां हैं नहीं, दूसरी ओर अदृश्य आंकड़ों जैसे सिंचाई का क्षेत्र बढ़ गया, बिजली उत्पादन बढ़ा, सड़कें बनीं, आदि बातें कहने से लोगों का दिल नहीं जीता जा सकता, वहीं कांग्रेस ने कमलनाथ को प्रदेशाध्यक्ष और दिग्विजय सिंह को आगे करके भाजपा को वह मौका दे दिया है, जो उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।"

अमित शाह ने यहां कहा कि वह वर्ष 2003 से पहले सड़क मार्ग से जब गुजरात से बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आते थे, तो पता ही नहीं चलता था कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। तब मध्यप्रदेश की पहचान बीमारू राज्य के तौर पर हुआ करती थी, आज स्थितियां बदल गई हैं।

शाह ने एक तरफ जहां दिग्विजय सिंह के शासनकाल में राज्य की बदहाली का जिक्र किया तो दूसरी ओर दिग्विजय को पिछड़ा वर्ग विरोधी करार दे दिया। उन्होंने कहा, "देश का पिछड़ा वर्ग आयोग संवैधानिक मान्यता के लिए छह दशक से इंतजार कर रहा है, भाजपा ने लोकसभा में बहुमत के आधार पर इस विधेयक को पारित कर राज्यसभा में भेजा। वहां भाजपा का बहुमत न होने पर दिग्विजय सिंह ने पिछड़ा वर्ग में अल्पसंख्यकों को जोड़ने की मांग करके इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया।"

शाह राज्य के वर्ष 2003 के हालात और वर्ष 2018 तक आए बदलाव का ब्यौरा कार्यकर्ताओं के जरिए गांव-गांव तक भेजने की बात कहकर यह संदेश दे चुके हैं कि भाजपा प्रदेश के मतदाताओं को वर्ष 2003 के हालात की याद दिलाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का कोई अवसर नहीं चूकेगी।

भाजपा अपनी सफलता के लिए कांग्रेस काल की खामियों और दिग्विजय सिंह के 'अल्पसंख्यक समर्थक' होने का राग अलापकर ध्रुवीकरण का दांव भी खेल सकती है।

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अंतिम नवीनीकृत: 06 मई, 2018

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