फिल्म के सभी कलाकार स्टार होते हैं : सुधीर मिश्रा
फिल्म के सभी कलाकार स्टार होते हैं : सुधीर मिश्रा

प्रज्ञा कश्यप

 नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)| फिल्मकार सुधीर मिश्रा विशुद्ध मसाला फिल्मों से अलग दर्शकों की सोच पर चोट करने वाली फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित सुधीर मिश्रा मानते हैं कि फिल्म की सफलता में किसी एक कलाकार का योगदान नहीं होता, बल्कि इसमें काम करने वाला हर कलाकार महत्वपूर्ण होता है, सभी उस फिल्म के स्टार होते हैं।

इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी को पहले बतौर चरित्र कलाकार के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब वे स्टार हैं, तो क्या लोगों के बीच प्यार-मोहब्बत करने वाले फिल्मी हीरो की पारंपरिक छवि बदली है, इस सवाल पर सुधीर ने आईएएनएस को बताया, "अगर ऐसा है तो यह अच्छी बात है। मुझे तो यह अंतर समझ ही नहीं आता है। हमारे समाज में हीरो की छवि स्थापित कर दी गई है जो प्यार-मोहब्बत, नाचने-गाने, विलेन को मारकर आखिर में हीरोइन को हासिल करने वाले की है, जबकि फिल्मों में इससे अलग भी हीरो होते हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारे पास नवाज है, राजकुमार राव हैं..और आयुष्मान खुराना भी हैं, कल को शायद आप पंकज त्रिपाठी को बतौर फिल्म के मुख्य किरदार में देखें, क्योंकि उनका भी फिल्मों के चलने में योगदान होता है और उन्हें भी लोग पसंद करते हैं। उदाहरण के लिए आप मिस्टर इंडिया को देखे तो उसमें अनिल कपूर हैं, लेकिन श्रीदेवी भी हैं और अमरीश पुरी भी हैं जो मोगैंबो हैं, आप किसी एक किरदार को सारा श्रेय नहीं दे सकते। फिल्म की सफलता पर पटकथा और सभी का बराबरी का हक होता है और सभी उसके हीरो होते हैं।"

'धारावी' से लेकर 'हजारों ख्वाहिशें' और 'चमेली' जैसी फिल्मों के कारण बतौर नायिका प्रधान फिल्मों के निर्देशक के रूप में प्रसिद्ध सुधीर मिश्रा से जब पूछा गया कि आज देश में महिला सुरक्षा के स्तर को आप कहां पाते हैं, इस पर उन्होंने कहा, "यह सोचने वाली बात है कि हम कहां पहुंच गए हैं, जहां ऐसी चीजें हो रही हैं। ये कौन लोग हैं जो एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वालों का साथ दे रहे हैं। वे बच्ची के साथ नहीं खड़े हैं, बल्कि उसके साथ गलत करने वालों के साथ खड़े हैं।"

उन्होंने कहा, "यह वीभत्स है..इसके लिए सभी जिम्मेदार हैं। हम लोग आपस में बंटे हुए हैं, सत्ता पर बैठे लोगों का वोटबैंक बन गए हैं। जनता की सेवा के नाम पर सत्ता में आए लोगों को तो यह नहीं करना चाहिए और न उन्हें ऐसे लोगों को बचाना चाहिए। यह बहुत खराब ट्रेंड है।"

सुधीर मिश्रा की फिल्मों की नायिकाएं कमजोर नहीं होतीं, यही उनकी हालिया रिलीज फिल्म 'दास देव' में नजर आ रहा है। इस फिल्म में पारो का किरदार ऋचा चड्ढा ने निभाया है, इस बारे में बात करते हुए सुधीर कहते हैं, "जी बिलकुल, मेरी पारो बहुत मजबूत है। पारो के किरदार के लिए मैं हीरोइन की तलाश कर रहा था, मैं सोच रहा था कि आज की पारो कौन हो सकती है जो देसी होने के साथ-साथ स्वतंत्र, आत्मनिर्भर, मुंहफट, तेज-तर्रार हो..मुझे शर्मीली, सकुचाई पारो नहीं चाहिए थी जो घर के अंदर बंद रहती हो, मुझे इसके लिए ऋचा एकदम उपयुक्त लगीं। चूंकि मेरी पारो एक जटिल शख्सियत है, उसका किरदार जटिल है इसलिए मैंने ऋचा को चुना और उन्होंने हां कह दी।"

अपनी बात खत्म करते हुए सुधीर कहते हैं, "मुझे मीडिया से शिकायत है। मुझे कुछ दिनों से यह कहा जा रहा है कि आपकी फिल्मों में स्टार नहीं होते हैं..कोई फिल्म 100 करोड़ की कमाई करे तो आप उस फिल्म के कलाकार को स्टार बोलते हैं। ऋचा की फिल्मों, जैसे फुकरे रिटर्न्‍स ने 100 करोड़ कमाए तो आपको उन्हें भी स्टार ही मानना चाहिए। मुझे लगता है कि यहां भी थोड़ा लिंगभेद है। लोगों की सोच ऐसी बन गई है जिसे आप बदल सकते हैं, क्योंकि आपके पास ऐसा करने की ताकत है। आप जो बोलेंगे, लोग उसे सुनेंगे और मानेंगे।"

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