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फेफड़े के कैंसर के इलाज में टागेर्टेड और इम्यूनो थेरेपी बेहद कारगर

फेफड़े के कैंसर के इलाज में टागेर्टेड और इम्यूनो थेरेपी बेहद कारगर  

19 फ़रवरी, 2019  

नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)| फेफड़े के कैंसर के इलाज में टागेर्टेड थेरेपी बेहद कारगर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि टागेर्टेड और इम्यूनोथेरेपी से स्टेज 4 फेफड़े के कैंसर वाले रोगी भी अच्छी गुणवत्ता वाला जीवन जी सकते हैं। नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के सीनियर विशेषज्ञ डॉ. उल्लास बत्रा ने बताया कि फेफड़े के कैंसर का पता प्राय: बाद के स्टेज में ही हो पाता है। इसीलिए मात्र 15 प्रतिशत मामलों में ही इसका इलाज संभव हो पाता है। हालांकि टागेर्टेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी रणनीतियों और नए शोध से उम्मीद की किरण दिखी है।



'कमला नेहरू मातृ एवं शिशु अस्पताल राज्य का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान होगा'

'कमला नेहरू मातृ एवं शिशु अस्पताल राज्य का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान होगा'  (16 फ़रवरी, 2019)

शिमला, 16 फरवरी (आईएएनएस)| हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार, कमला नेहरू मातृ एवं शिशु अस्पताल को राज्य में मातृ और शिशु देखभाल के लिए प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित करेगी और यह संस्थान नवीनतम उपकरणों व अन्य बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित होगा। कमला नेहरू अस्पताल में 17.5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पांच मंजिला भवन मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य ब्लॉक (एम.सी.एच) का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ शिशु स्वास्थ्य विंग में ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम और न्यू बोर्न नर्सरी में 3.25 करोड़ रुपये की मशीनरी व उपकरण लगाए जाएंगे।

शारीरिक निष्क्रियता बीमारी व विकलांगता का प्रमुख कारण

शारीरिक निष्क्रियता बीमारी व विकलांगता का प्रमुख कारण  (15 फ़रवरी, 2019)

नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)| यह सामान्य ज्ञान है कि शारीरिक निष्क्रियता बीमारी और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। कुछ न करने से बेहतर है कि कोई भी गतिविधि की जाए। लोगों को प्रति सप्ताह 150 मिनट तक मध्यम व्यायाम करना चाहिए, लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि यह सिफारिश कुछ लोगों को भारी लग सकती है। द लांसेट में प्रकाशित एक लेख में पाया गया कि 10 में से 4 भारतीय पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं हैं। कुछ अध्ययनों ने यहां तक कहा है कि 52 प्रतिशत भारतीय शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं। एक अन्य अध्ययन से संकेत मिला है कि गतिहीन जीवन शैली धूम्रपान, मधुमेह और हृदय रोग से भी बदतर है।

रैजुमैब इंजेक्शन से आंखों की रोशनी होती है प्रभावित, प्रयोग से बचें : विशेषज्ञ

रैजुमैब इंजेक्शन से आंखों की रोशनी होती है प्रभावित, प्रयोग से बचें : विशेषज्ञ  (14 फ़रवरी, 2019)

नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)| व्रिटीओ रेटिना सोसाइटी ऑफ इंडिया (वीआरएसआई) ने रैजुमैब इंजेक्शन लगाने से देखने की शक्ति प्रभावित होने सहित अन्य दुष्प्रभावों के मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है और रोगियों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आह्वान किया है। वीआरएसआई द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि रैजुमैब इंजेक्शन लगाने से मरीजों की आंखों की मध्यम पुतली को नुकसान पहुंचने और उनके देखने की शक्ति प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है। इसलिए इंटास से रैजुमैब इंजेक्शन (बैच नंबर-18020052) का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है।

गम्भीर जटिलताएं पैदा कर सकता है गर्भावस्था में पेट दर्द

गम्भीर जटिलताएं पैदा कर सकता है गर्भावस्था में पेट दर्द  (14 फ़रवरी, 2019)

नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)| आमतौर पर गर्भावस्था में पेट दर्द होना सामान्य बात है लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है तो परेशानी बढ़ सकती है। गर्भावस्था में किस तरह का पेट दर्द सामान्य माना जा सकता है और किस तरह का नहीं, इसे समझना जरूरी है। उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अमरसिंह चूंडावत के अनुसार गर्भाशय का विस्तार होने के साथ चूंकि मां के अंग शिफ्ट हो हाते हैं और साथ ही अस्थि-बंधन एक साथ फैल रहे होते हैं, ऐसे में पेट दर्द स्वाभाविक भी है। लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि पेट दर्द को कब गम्भीरता से लिया जाए।


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